Tuesday, July 30, 2013

वो भी नहीं, मैं भी नहीं...
( जैसे नदी के एक किनारे खड़े होकर देखो तो सिर्फ सामने वाला किनारा नज़र आता है वैसे हीं हर रिश्ते में अपना हिस्सा अमूमन नज़र नहीं आता.... और जो अगर दिख जाए तो बीच का फ़ासला नहीं रह जाता)

ग़लतियों से जुदा वो भी नहीं... मैं भी नहीं,
दोनों इन्सां हैं, ख़ुदा वो भी नहीं ... मैं भी नहीं,

हम दोनों एक दूसरे को इल्ज़ाम देते हैं मगर,
अपने अन्दर झांकता वो भी नहीं.. मैं भी नहीं,

लोगों ने कर दिया है दोनों में पैदा इख्तेलाफ़,
वरना... फ़ितरत का बुरा वो भी नहीं... मैं भी नहीं

मुख़्तलिफ़ सिमटों में, दोनों का सफ़र जारी रहा,
एक लम्हे को रुका वो भी नहीं... मैं भी नहीं

चाहते दोनों हैं एक दूसरे को मगर,
ये हक़ीकत मानता वो भी नहीं... मैं भी नहीं ।

Monday, March 18, 2013

" ग़म होते हैं जहां ज़हनत होती है, दुनिया में हर शय की क़ीमत होती है..

  अक़सर वो कहते हैं वो मेरे हैं, अक़सर क्यों कहते हैं हैरत होती है...

  तब हम दोनों वक्त चुराकर लाते थे, अब मिलते हैं जब भी फ़ुरसत होती है..."
(दिल और दिमाग की लड़ाई के बीच जब थोड़ा वक्त बचा तो ये ख़्याल आया कि अगर दिमाग न होता तो दुनिया की कितनी मुश्किलें कम हो जाती... परखने की आदत से निजात मिल जाती... शायद आप भी जब इसे पढ़ेंगे तो एक बार के लिए सहमत हो जाएंगे इस सोच से, लेकिन फिर दिमाग अपना काम शुरु कर देगा और आप तर्क के समंदर में डूबते चले जाएंगे कि दिमाग के न होने जैसी बेफ़ज़ूली की बात कोई कर भी सकता है... यही कमाल है दिमाग का... और इसीलिए जो ख़्याल ज़हन में आया वो ये था... )


उसे फ़क्र है उसकी कलाकारी पर कि उसने दिल भी बनाया, दिमाग भी....

मुझे अफ़सोस है उसके हुनर पर कि उसने दिल तो बनाया, पर दिमाग भी.

Sunday, April 22, 2012

आज तुम्हारे कमरे में.....

(कहते हैं जीवन में प्यार सबसे खूबसूरत एहसास है... सच है... लेकिन कभी अगर वो प्यार बिछड़ जाए तो मन में एक बड़ा हिस्सा सा खाली रह जाता है.. मानो एक कमरा, जिसमें वो सारी यादें होती हैं जो उस प्यार से जुड़ी हों... और उस कमरे की चाभी जैसे वो शख्स साथ लेकर चला गया हो... आप उस कमरे में झांक तो सकते हैं लेकिन उसे न तो खोल सकते हैं, न तोड़ सकते हैं और न किसी और को दे सकते हैं... )

आज तुम्हारे कमरे में फिर झांका...
कुछ यादें मेज़ पर बिखरी पड़ी थीं...
तुम्हारी मुस्कुराहट आज भी हवा में तैर रही थी...
कमरे का हर कोना आज भी तुम्हारे बदन की खुशबू से महक रहा था...

फर्श गीली थी..
शायद मेरे आंसू दरवाज़े के नीचे से तुम्हें ढूंढने गए होंगे...
पर्दे के पीछे आज भी तुम्हारी शर्म छिपी बैठी थी...
और पूरा कमरा तुम्हारे सुनहरे रंग से आज भी दमक रहा था..

बिछावन की सिलवटों के बीच
तुम्हारे साथ बिताए पल दबे पड़े थे...
तुम्हारे हाथों में हाथ लिए, तुम्हें निहारती आंखें
कोने में तकिए के नीचे मिलीं...

आइना अब भी तुम्हारे गोरे चेहरे से लिपटा
मेरा श्यामल चेहरा सीने से लगाए बैठा है...
पगला कहीं का...

वहां, उधर.. कितनी किताबें पड़ी हैं
जिनके पन्नों के बीच हमारे ऱुठने मनाने के किस्से रखे हैं...
और जिन पन्नों पर तुम्हें खत लिखे थे
उन्हें कमबख्त हवा बिखेर गई है...

तुम्हारी खिलखिलाहट कमरे में गूंज रही थी
न जाने फिर भी, मेरे अंदर इतना सन्नाटा क्यों था...

ज़ोर-ज़ोर से दरवाजा पीटता हूं,
लेकिन जो ताला तुम लगा गई थी,
वो खुलता नहीं...

वक्त  बहुत गुजर गया है...
लेकिन यादों के इस कमरे पर धूल भी नहीं जमती...
पर मन मानों जम गया है..
थोड़ी देर इस कमरे में झांकता हूं
तो पुरानी यादें, गर्माहट दे जाती हैं...


पर... जानता हूं, अब तुम नहीं आओगी,
लेकिन मेरी सांसें तो लौटा दो,
जो वहीं, उसी कमरे में रह गई हैं...

और नहीं तो कम से कम
इस मुर्दा शरीर को दफना जाओ...
ताकि उन बेचैन सांसों को सांस मिले...


Saturday, October 15, 2011

Breaking News-- रामलीला Live

पिछले कई दिनों से एक ख्याल रामलीला को लेकर मन में था पर वक्त हीं नही मिल पा रहा था कि लिखूं... दरअसल हिन्दी मीडिया में काम करते कई साल हो गए औऱ महसूस किया है कि कुछ खबरें तो ऐसी हैं जो साल दर साल, बार-बार चलती हैं और उनमें कुछ भी नया नहीं होता... पर दिखाना है तो दिखाना है... उन्हीं में से एक है 'रामलीला'..

जिस वक्त रावण का वध हुआ होगा, राम जी ने खुद नहीं सोचा होगा कि एक समय ऐसा भी आएगा जब रावण के मरने की खबर ब्रेकिंग न्यूज में चला करेगी... लेकिन टीवी चैनल्स की महिमा ही है कि अब उधर ऱावण की तरफ तीर बढ ही रहा होता है कि उससे पहले हीं, पहले से तैयार किया गया ब्रेकिंग न्यूज का चस्पा स्क्रीन पर चिपक जाता है... Breaking News-- दिल्ली के रामलीला मैदान में रावण जला... कुंभकरण भी 'धूं-धूं' कर जला....

खैर, इस साल भी कमोबेश यही हाल था... हर चैनल रावण को सबसे पहले मरते हुए दिखाने का दावा कर रहा था... रावण को मरते हुए लाइव दिखाने का दंभ भर रहा था... कि अचानक एक ख्याल मन में कौंधा... कि अगर राम और रावण वाकई आज के युग में होते और राम ने रावण का दहन कर दिया होता तो उसकी ब्रेकिंग कैसे चलती... खासतौर पर तब जब राम और रावण दोनों हीं आज के युग के 'आम आदमी' होते....

सबसे पहले न्यूज चैनल की असाइनमेन्ट डेस्क (न्यूज चैनल्स की वो जगह जहां खबरें आकर सबसे पहले गिरती हैं) पर फोन घनघनाता...

असाइनमेन्ट डेस्क का बंदा- हैलो, कौन?
रिपोर्टर- मनोज बोल रहा हूं सर...

असाइनमेन्ट डेस्क का बंदा- अरे मनोज, का रे... तुम तो बिरयानी खिलाने वाले थे... गायबे हो गए...
रिपोर्टर- का करें भाई, कामे इतना है... खैर, सुनिए तो... एक ब्रेकिंग चलवा दिजिए...

असाइनमेन्ट डेस्क का बंदा- का हुआ...
रिपोर्टर- अरे, दिल्ली में रामलीला मैदान के पास एक आदमी तीन लोगों को जिन्दा जला दीहिस है...

असाइनमेन्ट डेस्क का बंदा- का बात कर रहे हो... तीनों एक्के फैमिली के थे?
रिपोर्टर- हां

असाइनमेन्ट डेस्क का बंदा- और बताओ खबर... एक लाइन का ब्रेकिंग थोडे हीं चलेगा...
रिपोर्टर--- अरे, जो जलाइस है उसका नाम राम है... और तीन गो भाई था... रावण, कुंभकरण और मेघनाद... तीनों को जला दिया है... जिन्दा... लड़की का मामला है... इ रावण जो है, राम की बीवी को भगा ले गया था... उसी का कुछ पंगा था... सो साला, गुस्से में आज तीनों को जला दीहिस है...

असाइनमेन्ट डेस्क का बंदा- साला... इ तो बड़ी खबर है... विजुअल बना लिए हो...
रिपोर्टर- अरे, झमाझम विजुअल है... एक दम लाइव.... तीनों का जलते हुए...

असाइनमेन्ट डेस्क का बंदा- चलों ब्रेकिंग चलवा रहे हैं... बाकि फोनो पर बताना....
रिपोर्टर- ओके...

असाइनमेन्ट डेस्क का बंदा- आउटपुट... आउटपुट... (आउटपुट न्यूज चैनल का वो हिस्सा है जिसके पास आयी हुई खबर का बलात्कार करने या सत्कार करने का फैसला लेने का अधिकार होता है..)

असाइनमेन्ट डेस्क का बंदा- आउटपुट ध्यान दिजिए... ब्रेकिंग है... दिल्ली के रामलीला मैदान के पास एक शख्स ने तीन लोगों को जिन्दा जला दिया है... जलने वाले तीनों भाई थे... लड़की का मामला है... जलाने वाले का नाम राम है... जो जले हैं वो रावण, कुंभकरण औऱ मेघनाद हैं... राम की बीवी को रावण भगा ले गया था... उसी से गुस्सा राम ने तीनों को जला दिया है... जल्दी चला लिजिए... अभी तक किसी चैनल के पास खबर नहीं है... विजुअल की आई डी भई बस फ्लैश कर रहे हैं....

खबरों के अकाल में घिसी पिटी खबरें चला रहे आउटपुट के लिए ये खबर संजीवनी से कम नहीं होगी... तुरंत हरकत में आएंगे सारे महानुभाव बॉसेस...

पहला बॉस-- आउटपुट... खबर तोड़ दिजिए...
आउटपुट-- सर राखी सावंत का शो का रिपीट चल रहा है...

बॉस- अरे बाप रे... कोई नहीं, विजुअल अच्छा है तो थोडी देर ले लो...
आउटपुट-- विजुअल तो झमाझम है... जलाते हुए लाइव विजुअल हैं...

बॉस-- बहुत बढिया... ले लो तुरंत... और सुनो... वर्चुअल सेट बनवा लो... औऱ एक बग के लिए भी बोल दो...
आउटपुट-- जी सर...

थोड़ी ही देर में टीवी स्क्रीन पर खबर इतने बड़े-बडे औऱ मोटे-मोटे अक्षरों में फ्लैश होगी कि अंधा भी पढ ले... औऱ फिर एंकर चीख-चीखकर बताएगा कि कैसे दुनिया का सबसे बड़ा पाप हो गया है...

एंकर-- इस वक्त की बड़ी खबर हम आपको बता दें जो आ रही है दिल्ली के रामलीला मैदान से... जहां एक निर्दयी शख्स ने तीन तीन लोगों को जिन्दा जला दिया है... इस शख्स का नाम राम बताया जा रहा है... खबर के मुताबिक राम की बीवी सीता को रावण नाम का शख्स भगा ले गया था...राम ने कई बार पुलिस में शिकायत भी दर्ज करायी लेकिन नतीजा सिफर हीं रहा...औऱ इसी वजह से गुस्से में राम नाम के इस शख्स ने तीन भाईयों, रावण, कुंभकरण औऱ मेघनाद को जला दिया है... इस वक्त हमारे संवाददाता मनोज हमारे साथ जुड रहे हैं ज्यादा जानकारी के साथ...मनोज...मनोज... सबसे पहले तो हमारे दर्शकों को ये बताईए कि हुआ क्या है....

बेचारा मनोज भी अब वही सारी बातें जो महज कुछ सेकेंड पहले एंकर ने कहीं थी, बताएगा...

एंकर-- मनोज ये बताइए कि इन तीनों की हालत कितनी गंभीर है...
मनोज(रिपोर्टर)- जी.. हम आपको बता दें कि तीनो बुरी तरह से जल गए हैं... कुंभकरण ने तो मौके पर हीं दम तोड़ दिया था लेकिन रावण औऱ मेघनाद को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है... जहां डॉक्टर्स ने दोनों को 95 फीसदी से ज्यादा जला हुआ बताया है...

एंकर-- और मनोज, राम नाम के जिस शख्स ने इस कुकृत्य को अंजाम दिया है वो कहां है...

मनोज(रिपोर्टर)-- जी, हम आपको बता दें कि राम को इस वक्त पुलिस ले गयी है जिससे पूछताछ की जा रही है... दरअसल राम पिछले कई दिनों से परेशान चल रहा था.... उसके पिता ने उसे फैमिली बिजनेस से बेदखल कर दिया था.. उसने अपना बिजनेस शुरु करने की कोशिश की पर वो चल नहीं पाया... अपने भाई लक्ष्मण औऱ बीवी सीता के साथ वो दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में एक छोटे से घर में किसी तरह से गुजारा कर रहा था... इसी दौरान, माइनिंग का बिजनेस करने वाले रावण की नजर सीता पर पड़ी... औऱ एक दिन वो उसे भगा ले गया... औऱ...

एंकर-- मनोज, हम आपको थोडी देर के लिए रोक रहे हैं...हम दर्शकों को वो तस्वीरें दिखा दें जो मानवता के नाम पर धब्बा हैं... हम आपको ये भी बता दें कि आप ये 'एक्सक्लूसिव' तस्वीरें सबसे पहले xyz चैनल पर देख रहे हैं... ये घटना की तस्वीरें हैं... आप खुद देखिए कि कैसे राम नाम के इस शख्स ने इन तीन भाईयों को जिन्दा जला डाला...एक ऐसी खबर जो हर आंख में आंसू ले आएगी... राम नाम का ये शख्स इंसानियत के नाम पर धब्बा है... हालांकि इसके भी दर्द को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिस तरह से इसकी बीवी को भगा ले गया था रावण औऱ पुलिस से भी उसे कोई मदद नहीं मिली... लेकिन फिर भी... फिर भी जो राम ने किया उसे कतई सही नहीं ठहराया जा सकता... इन तस्वीरों में राम की हैवानियत साफ झलक रही है... बदले की आग में जल रहे राम ने रावण और उसके भाईयों को जिन्दा जला डाला... गौर से देखिए इन तस्वीरों को..

इस बीच कार्यक्रम को लंबा खींचने के लिए फोनो लिए जाएंगे और फोन लाइन्स आम लोगों के लिए भी खोल दी जाएंगी...

एंकर-- हम आप दर्शकों से भी चाहेंगे कि दिल्ली की इस दिल दहला देने वाली वारदात पर अगर आप कुछ कहना चाहें तो हमें फोन कर सकते हैं....

एंकर-- औऱ इस वक्त हमारे साथ जुड गए हैं इलाके के डीसीपी अजीत पांडे जी... जी सर, बताएं... कैसे अंजाम दिया इस शख्स ने इस घटना को...

डीसीपी साहब-- देखिए, अभी इस शख्स से पूछताछ चल रही है... इसके कुछ साथियों की भी तलाश की जा रही है... एक तो इसका भाई है लक्ष्मण औऱ दूसरा इसका साथी है हनुमान सिंह... उन दोनों को भी हम ढूंढ रहें हैं... दोनों की भी मामले में संलिप्तता के सुराग मिले हैं... हनुमान सिंह तो पहले भी रावण को एक दो बार धमकी देकर आ चुका था ऐसी खबरें भी मिल रही हैं.... जैसे जैसे जानकारी मिलेगी हम आपको बताएंगे....

एंकर-- बहुंत शुक्रिया सर आपका... जैसा कि आपने सुना, डीसीपी अजीत पांडे जी ने खुद बताया कि पूरे मामले में राम अकेला नहीं था, उसके साथ उसका भाई लक्ष्मण औऱ साथी हनुमान सिंह भी थे... यानि पूरी सोची समझी साजिश के तहत इस घटना को अंजाम दिया गया है... इस बीच हमारे संवाददाता मनोज भी हमारे साथ बने हुए हैं.... जी मनोज, ये बताएं कि सीता, जिसकी वजह से ये सबकुछ हुआ वो कहां है

मनोज(रिपोर्टर)-- जी, हम आपको बता दें कि सीता नाम कि ये महिला एक हाउस वाइफ है... इसके पिता का भी अच्छा खासा कारोबार है लेकिन राम से शादी के बाद से हीं इसके बुरे दिन चल रहे थे... फिलहाल ये महिला थाने में हीं है अपने पति राम के पास....

एंकर-- जी मनोज... हम आपको रोक रहे हैं... इस वक्त दिल्ली से मीना जी हमारी एक दर्शक हमारे साथ फोन लाइन पर जुड़ गयी हैं... जी मीना जी, क्या कहना चाहेंगी आप...

मीना जी(दर्शक)-- हमें तो लगता है कि राम को भी जिन्दा जला देना चाहिए... बताओ भईया... ये कोई तरीका हुआ... तीन-तीन लोगों को बीच चौराहे जिन्दा जला दिया...सबके सामने... ऐसे आदमी को तो फांसी देनी चाहिए...

एंकर-- जी मीना जी, बहुत बहुत शुक्रिया आपका... अपनी राय हमारे साथ बांटने के लिए... और फिलहाल हम रुक रहे हैं एक छोटे से ब्रेक के लिए लेकिन ब्रेक के बाद भी हम इस बड़ी खबर पर बने हुए हैं....

और ब्रेक के बाद भी फोन, राम के घर के विजुअल, उसके परिवार का पूरा बॉयोडाटा, रावण के परिवार के पुराने विजुअल, अलग अलग शहर के लोगों की प्रतिक्रिया और ना जाने क्या क्या... सबकुछ मिला कर ये कि पूरे दिन का मसाला...


इतना सब दिमाग में आने के बाद लगा कि शुक्र है कि जब राम जी ने रावण वध किया उस वक्त न्यूज चैनल्स नहीं थे वरना वो भी हे राम..हे राम कहते हुए सीता जी के साथ हीं धरती में समा जाते....

Wednesday, October 27, 2010

बरगद का 'वो' पेड़...

किसी बेहद करीबी ने हाल में हीं अपनी रचना के ज़रिए समझाया कि हर रिश्ता नाज़ुक फूल की तरह है... रचना में लिखा था कि अगर प्यार ना मिले तो फूल मुरझा जाता है... बात उम्दा लगी... समझ में भी आयी... लेकिन कुछ सवाल छोड़ गयी अंदर... मसलन, क्या फूल के मुरझाने का दर्द सबसे ज्यादा उस फूल को होता होगा या उस माली को जिसने न जाने कितने जतन से उस फूल को बीज से फूल तक का सफर तय करते देखा है... क्या माली का भी अपना दर्द होता होगा जिससे उसने फूल को हमेशा दूर रखा होगा... क्या माली भी कभी फूल से कुछ चाहता होगा... कुछ ऐसे हीं सवाल... लेकिन जो बात कही गयी थी वो पते की लगी तो ज़हन में उतार ली...लगा, जैसे एक फूल कितना कुछ कह सकता है...

फिर, एक दिन दफ्तर में ना जाने कितने सालों से चट्टान की तरह खड़ा रहने वाला बरगद का पेड़ धराशायी हो गया... पेड़ इतना बड़ा था कि गिरा तो यकीन नहीं हुआ कि एक आंधी की मार ने उसे हिलाया हो... पर चर्चा इसी बात की हो रही थी तो सबने मान लिया कि आंधी की ताकत उस एक वक्त पर ज्यादा रही होगी... मेरा मन नहीं माना... आते-जाते, गुज़रते हमेशा उस पेड़ को देखा करता... हर शाम सुनायी देने वाली , न जाने दिनभर का कौन सा काम निपटाने के बाद लौटने वाली सैंकड़ों चिड़ियों की चहचहाहट अनायास याद आ जाती... क्योंकि मैं भी अमूमन उसी वक्त टहल टहल कर फोन पर बात करता और शायद मेरी बातचीत वो सुनते और उनकी मैं... मैं कई बार डिकोडिंग करने की कोशिश भी करता कि क्या कोइ चिड़िया अपने दिन भर का दर्द बता रही होगी किसी दोस्त को, तो कोइ नन्ही चिड़िया मां से खाना मांग रही होगी, तो किसी पति-पत्नि में झगड़ा हो रहा होगा कि आने में इतनी देर क्यों हुई... वगैरह-वगैरह....

पर सवाल ये था कि इतना मज़बूत दिखने वाला बरगद का 'वो' पेड़ गिर कैसे गया... और जवाब भी जल्द हीं मिल गया...
एक दिन पेड़ के जड़ के हिस्से को देखा तो दिखा कि पेड़ तो अन्दर हीं अन्दर बिलकुल खोखला हो चुका था... जड़ें हिल चुकी थीं... बाहर से मज़बूती की मिसाल दिखने वाला 'वो' पेड़, अंदर से कमज़ोरी की दास्तान बयां कर रहा था...

और फिर एक ख्याल आया... कितने हीं ऐसे लोग हैं जो बाहर से यूं ही मज़बूत नज़र आते हैं... हर वक्त लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाले और उनमें ऊर्जा भरने वाले 'वो' लोग जो कब अंदर हीं अंदर खोखले होते जाते हैं, किसी को पता नहीं चलता... खुद के खोखलेपन से दूर रखकर कभी छांव, तो कभी पनाह देने वाले उस बरगद के पेड़ का दर्द भी शायद यही था कि उसके अंदर कोई झांक नहीं पाया... लोगों की उसकी छांव दिखती, उसकी खूबसूरत हरी पत्तियां दिखतीं, उसपर गुलज़ार घरौंदे दिखते, उसकी भव्यता दिखती लेकिन अंदर हीं अंदर उसे क्या खाए जा रहा था... किसी को ना दिखता...

एक दिन बरगद का 'वो' पेड़ गिर गया... और अब 'वो' कभी नहीं उठेगा... पर सवाल रह रह कर मन में उठ रहा है...
फूल का मुरझाना तो दिख जाता है पर बरगद के उस पेड़ का अंदर हीं अंदर खोखला हो जाना क्यों नहीं दिख पाता... ???

Saturday, October 23, 2010

आखिर क्यों....

(आजकल बहुत से लोग, जो मुझे अरसे से जानते हैं, कहते हैं मैं बहुत बदल गया हूं... बहुत चुप हो गया हूं... बोलता नहीं... जब लिखने बैठा था तो लगा था कि बहुत कुछ कह पाउंगा लेकिन यहां भी शब्दों के जरिए भी बहुत कम हीं कह पाया... न जाने क्या हुआ और बस आधा-अधूरा लिखकर खत्म कर दिया... यहां भी बोल नहीं पाया... :-(


पूरे चांद की रात है,
सन्नाटे का साथ है...
घर की मुंडेर पर खड़ा ताक रहा हूं
शायद खुद में हीं झांक रहा हूं...

गुलाबी ठंड लिए हवा अभी बगल से गुज़री है
पर मन तो न जाने कब से जमा है
सब चल रहे हैं, बढ़ रहे हैं
पर मेरा तो हर हिस्सा जैसे वहीं थमा है...

जीवन के अनुभवों से छलनी अंतर्मन से
मानों सवाल रिस रहे हैं

सवाल, जो पूछते हैं

सबकुछ यूं हीं कब तक चलेगा
मुझको जो पढ़ ले, ऐसे किसी का ना होना कब तक खलेगा
हर लम्हा दूसरों के मुताबिक क्यों ढ़लेगा
जो हर पल जिए मुझे, वो कब मिलेगा........

और भी न जाने कितने सवाल
जवाबों के सूखे ने
जीने की लालसा को बंजर बना डाला है
औऱ अब तो सिर्फ यही पूछता हूं
क्यों... आखिर क्यों....